हरियाणा

रोहतक: मरीज के पेट से निकाले लोहे की कील, पेच, पत्ती एवं कांच के टुकड़े

पीजीआई गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के डॉक्टरों की टीम ने किया कमाल, मरीज ने निगल ली लिया था लोहे का सामान

अब नवीनतम मशीनों से पीजीआई में किया जा रहा है मरीजों का ईलाज, पीजीआई में 36500 मरीजों की जा चुकी है एंडोस्कोपी

रोहतक पीजीआई में एक गंभीर हालत में पहुंचे मरीज की जान बचा कर साबित कर दिया कि यूं ही, चिकित्सक को भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने एक मरीज के पेट से कुछ लोहे की तेज धार वाली कीले ,पेेच, पत्ती एवं कांच के टुकड़े निकाल कर उसे नया जीवन दिया है। अब इलाज के उपरांत मरीज स्वस्थ है।

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ प्रवीण मल्होत्रा ने एक 26 वर्षीय युवक की एंडोस्कोपी के माध्यम से मरीज का जीवन और सर्जरी दोनों बचाए गए। उन्होंने बताया कि मरीज ने कुछ लोहे की तेज धार वाली कीले ,पेेच, पत्ती एवं कांच के टुकड़ेनिगल ली, जिसके चलते उसे पेट में दर्द होने लगा व उसे उल्टियां आने लग गई, इस मरीज ने क्यों यह चीजें निगली इसका कारण उसने स्पष्ट नहीं किया।

उन्होंने बताया कि इस मरीज को पहले उसके जिले के अस्पताल में दिखाया गया और जब उसके पेट का एक्सरे किया गया तो चिकित्सक उसके पेट में नुकीली चीजें देखकर हैरान रह गए और उसे तुरंत पीजीआईएमएस में रेफर किया गया। डॉ मल्होत्रा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एंडोस्कोपी की गई तो उसमें पता चला कि मरीज के पेट में लोहे की कील ,पेच, पत्ती एवं कांच के टुकड़े थे और उसमें से कुछ पेट में धंसना शुरू कर चुके थे। उन्होंने बताया कि क्योंकि मरीज को इन्हें निगले लगभग 10 दिन बीत चुके थे और यदि इन्हें ना निकाला जाता तो यह कीले पेट व आंत को फाड़ सकते थे ,जिससे मरीज की इंफेक्शन से जान जा सकती थी। डॉ प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि ऐसे में उनके सामने मरीज की जान बचाने के लिए सिर्फ एक तरीका था कि जल्द से जल्द एंडोस्कोपी के माध्यम से इन्हें बाहर निकाला जाए। उन्होंने बताया कि इस मरीज के पेट में दबी हुई कील ,पेच व पत्ती और कांच को उन्होंने करीब 20 मिनट की एंडोस्कोपी सर्जरी से सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। पीजीआई में अब तक 36500 मरीजों एंडोस्कोपी की जा चुकी है।

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