हरियाणा

सोनीपत की गरिमा ने यूपीएससी में पाई 220वी रैंक

सोनीपत बेटियां हर क्षेत्र में कमाल कर रही है और अब बेटियां चूल्हा चौका छोड़कर हवाई जहाज से लेकर यूपीएससी जैसी कठिन पढ़ाई में अपना परचम लहरा रही है । सोनीपत की गरिमा गर्ग ने यूपीएससी में कमाल कर दिखाया है और जहां गरिमा ने यूपीएससी में 220 रैंक हासिल किया है और यह उन बेटियों के लिए एक मिसाल है जो चूल्हे चौके तक सीमित रह जाती है, और अपनी मंजिल को जहन में रखकर आगे नहीं बढ़ पाती हैं ऐसी बेटियों के लिए गरिमा आज एक पहचान बनकर उभरी है।

सोनीपत के गुड़ मंडी में रहने वाली गरिमा ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई हिंदू विद्यापीठ से पूरी की थी इसके उपरांत उन्होंने ड्यूल डिग्री के लिए साल 2011 से 2016 तक पढ़ाई की। गरिमा ने साल 2011 में बिट्स पिलानी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया तो वही आईटी की पढ़ाई भी इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ करती रही। गरिमा ने जैसे ही अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उन्हें 14लाख रुपए सालाना प्राइवेट नौकरी का ऑफर मिला था ।लेकिन गरिमा ने अच्छे पैकेजेस से दरकिनार कर अपना लक्ष्य यूपीएससी के लिए निर्धारित किया। अपनी पढ़ाई डब्बल डिग्री पूरी करने के उपरांत ही गरिमा ने यूपीएससी के लिए तैयारी शुरू कर दी थी और गरिमा ने बाजीराव दिल्ली से 1 साल की कोचिंग ली और उसके उपरांत घर पर ही कई घंटों लगातार पढ़ाई करती रही। गरिमा ने बताया कि उन्होंने यूपीएससी की 4 बार प्री और 2 बार मैन्स की परीक्षा पास की। बावजूद इसके यूपीएससी में रैंक नहीं मिल पाया । लेकिन हौसलों की उड़ान में कभी हार नहीं मानी और जहां उम्मीदें टूट जाती है वहां इंसान हार जाता है लेकिन गरिमा ने ना उम्मीद चूड़ी और ना ही हार मानी और एक मिलान के साथ अपनी पढ़ाई पर लगातार फोकस रखा और पांचवें प्रयास में गरिमा ने वाकई कमाल कर दिखाया और यह कमाल यूपीएससी में 220 वां रैंक हासिल करके दिखाया।

 गौरतलब है कि गरिमा के पिता राधाकृष्णन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में चीफ एसोसिएट के पद पर कार्यरत हैं तो वही माता सुनीता गर्ग दिल्ली में हिस्ट्री की लेक्चरर हैं। शिक्षा को महत्व देने वाला परिवार में गरिमा का भाई अमेरिका में साइंटिस्ट का मैनेजर है और बहन स्वाति गर्ग अमेजॉन में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत है। गरिमा सबसे छोटी है । उनकी माता और परिवार का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी को कभी चूल्हे चौके पर जाने के लिए दबाव नहीं दिया और उनका मानना है कि उनकी बेटी किसी मुकाम पर पहुंच जाएगी तो उसके बाद वह चूल्हा चौका अपने आप कर लेगी।

बाईट:- स्वाति की मां सुनीता गर्ग पेशे से एक टीचर हैं और उनका कहना है आज उनकी बेटी ने यूपीएससी में 220 बार रैंक हासिल किया है और उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। गुड़ की मिठास को जैसे लोग महसूस करते हैं वैसे ही खुशी आज उन्हें है और जिन्हें वह एक्सप्लेन नहीं कर सकती। उनकी बेटी बहुत मेहनती और सिंसियर है। पढ़ाई में उन्हें कभी टोकने की आवश्यकता नहीं पड़ी और अपनी पढ़ाई कार्यालय ध्यान रखती है। उनकी मां सुनीता गर्ग का यह भी कहना है कि यूपीएससी की पढ़ाई में रैंक आ जाए इसलिए गरिमा ने विवाह शादियों और पार्टी में बिल्कुल जाना छोड़ रखा था। मैंने अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए पूरा वक्त दिया है कभी रसोई में जाने तक नहीं कहा और आज उसी का परिणाम है कि उनकी बेटी ने यूपीएससी में सफलता हासिल की है।

महिलाओं और अन्य बेटियों के लिए संदेश देते हुए कहा कि खाना बनाना मात्र 6 महीने का कार्य है और यह व्यक्ति कभी भी सीख सकता है। खास तौर पर अभिभावकों को अपनी बेटियों को यह ताना कभी नहीं देना चाहिए कि उन्हें खाना बनाना नहीं आता और केवल पढ़ाई की तरफ से आकर्षित और ध्यान देने के लिए अग्रसर करना चाहिए और उसका फायदा एक ना एक दिन अवश्य निकल कर सामने आता है और उसी का परिणाम है कि आज उनकी बेटी ने यूपीएससी में सफलता हासिल की है।

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