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Tuesday, December 6, 2022
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति चुनौती का विषय,जिसे विद्या भारती ने प्रमुखता से स्वीकार किया- अवनीश भटनागर

सुल्तानपुर,14 नवम्बर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति चुनौती का विषय है।जिसे विद्या भारती ने प्रमुखता से स्वीकार किया । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ग्रामीण शिक्षा को लेकर विस्तार की अपार संभावनाए है। यह बातें विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित ,अखिल भारतीय बैठक जो ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा हेतु चिंतन बैठक है, को संबोधित करते विद्या भारती के महामन्त्री अवनीश भटनागर ने कहीं।

जन शिक्षा समिति के प्रदेश निरीक्षक राजबहादुर दीक्षित के संयोजकत्व में मंगलवार को आयोजित यह कार्यक्रम सरस्वती शिक्षा मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ग्राम भारती परितोष अमेठी में चल रहा है। चार दिवसीय अखिल भारतीय चिंतन बैठक का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष पूजन अर्चन एवं वंदना के द्वारा प्रारंभ हुआ।

बैठक में सोमवार को उद्घाटन सत्र में यतींद्र शर्मा राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री विद्या भारती, अवनीश भटनागर महामंत्री विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, डोमेश्वर साहू संगठन मंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र एवं पालक अधिकारी ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा, हेमचंद्र संगठन मंत्री पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र, रामय जी संगठन मंत्री गोरक्ष प्रांत, कैलाश चंद्र मिश्र अखिल भारतीय संयोजक ग्रामीण शिक्षा तथा विद्या भारती के 11 क्षेत्रों से आए हुए क्षेत्र प्रमुख एवं क्षेत्र संयोजक, ग्रामीण क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र प्रमुख, क्षेत्र संयोजक, प्रांत प्रमुख एवं प्रांत संयोजक सामिल है।

इस चिंतन बैठक में आये अतिथियों का अंग वस्त्र और श्री फल देकर स्वागत किया गया। ग्रामीण शिक्षा के अखिल भारतीय संयोजक कैलाश चंद्र मिश्र ने बैठक की प्रस्ताविकी अपने शब्दों में प्रस्तुत करते हुए कहा कि सन् 1952 में शिशु मंदिर की स्थापना की गई। अभिभावकों ने अपने आकांक्षा के अनुरूप अपने बच्चे को विद्यालय में प्रवेश कराएं। एक अच्छे संकल्पना के साथ यह विद्यालय 1952 में खोला गया।

विद्या भारती के अधिकारियों की इच्छा थी कि समाज एवं गांव के विकास के लिए शिशु मंदिर खोला जाए।पहले भारत सोने की चिड़िया कहलाता था, किंतु कालांतर में कुछ लुटेरों द्वारा भारत को लूटा गया। 1986 में मथुरा में एक बड़ी बैठक ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा हेतु आयोजित हुई । जहां पर ग्राम भारती में एक विद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया और ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा का एक प्रकल्प खोल दिया गया। जहां पर आज कई हजार बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि साक्षरता केवल शिक्षित करने की बात नहीं है, बल्कि एक आदर्श नागरिक बनाने की बात है। उन्होंने कहा कि लज्जाराम तोमर जी कहते थे कि प्रत्येक गांव से एक आदर्श बालक का निर्माण होना चाहिए। जिसमें शिक्षा, स्वस्थ्य,समरसता, स्वावलंबन,आदि अनेक गुणों से वह संपन्न हो। इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अमेठी जनपद में ग्राम भारती की नींव रखी गई।

अवनीश भटनागर महामंत्री विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान ने कहा कि सन 1983 में मध्य प्रदेश के सागर जिले की देवरी नामक स्थान पर एक बैठक संपन्न हुई। जिसमें ग्रामीण शिक्षा का एक व्यवस्थित स्वरूप नगला चंद्रभान की बैठक में रखा गया। इस बैठक में ग्रामीण शिक्षा के बारे में विधिवत चिंतन किया गया।

1983 से 2023 तक में आज 40 वर्ष बीत गए। आज ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति में अनेकों सुधार हुए। आज अनेको कृषि विज्ञान संस्थान हो चुके हैं। ग्रामीण शिक्षा के विकास हेतु और अधिक विस्तार की आवश्यकता है। शैक्षिक गुणवत्ता पर आज हम सबको विचार करना चाहिए, क्योंकि समाज हम सबका मूल्यांकन करता है। समाज के सोच में इन 40 वर्षों में क्या परिवर्तन आया अभी विचार करना है?आज गांव में वह सभी सुविधाएं हैं, जो कल शहरों में थी,आज शहरों की विकृतियां गांव तक पहुंच रही हैं।

गांव का समग्र विकास करना हम सबका कृत संकल्प है। संपर्कित गांवों का हम कैसे विकास करें? इस पर चिंतन करना है। आज पर्वतीय क्षेत्र, समुद्री क्षेत्र, मैदानी क्षेत्र, उत्तराखंड क्षेत्र आदि सभी जगह की समस्याएं अलग-अलग हैं। हमारे विद्यालय गांव में एक आदर्श प्रस्तुत करें,इसके लिए हमारी एक टीम होना चाहिए। हम सबका दायित्व ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों को स्वीकार करना एवं उनका विकास करना है। गुणात्मक विकास कैसे हो इसकी आवश्यकता है ।सामाजिक समस्याओं को दूर करके उनके साथ चलना विकृतियों को दूर करने के लिए अपने आचार्य को प्रशिक्षित करना होगा।

इस चार दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में विद्यालय प्रबंध समिति का विशेष योगदान रहा है। जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश के प्रांतीय मंत्री अनुग्रह नारायण मिश्र, विद्यालय के अध्यक्ष गोविंद सिंह चौहान, विद्यालय के प्रबंधक ओंकार नाथ शुक्ला ,प्रदेश समिति के सदस्य अशोक सिंह भी उपस्थित थे।

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